थायराइड के लक्षण, कारण और घरेलु एवं प्राकृतिक उपचार

थायराइड एक ऐसी बीमारी है जो आजकल बहुत आम हो गयी है। थायराइड की समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है। यह पुरुषों, महिलाओं यहां तक कि एक जन्म लेने वाले बच्चे को भी हो सकती है। लेकिन थायराइड होता क्या है?

थायराइड आपकी गर्दन के सामने एक तितली के आकार की ग्रंथि होती है। इसका काम थायराइड हार्मोन बनाना है। यह थायरोक्सिन नामक एक हार्मोन बनाता है जिसका इस्तेमाल आपके शरीर की हर कोशिका द्वारा किया जाता है। थायराइड हार्मोन शरीर को ऊर्जा का उपयोग करने, गर्म रहने और मस्तिष्क, हृदय, मांसपेशियों और शरीर के अन्य अंगों को काम करने में मदद करता है। यदि आपकी थायराइड ग्रंथि बहुत अधिक या बहुत कम थायराइड हार्मोन बनाती है, तो आपको थायराइड की स्थिति पैदा हो सकती हैं।

थायराइड की समस्या दो प्रकार की होती है: हाइपरथायरायडिज्म (hyperthyroidism) और हाइपोथायरायडिज्म (hypothyroidism)। हाइपरथायरायडिज्म तब होता है जब आपका थायरॉयड बहुत अधिक हार्मोन का उत्पादन करता है। दूसरी ओर, हाइपोथायरायडिज्म इसके ठीक विपरीत है। हाइपोथायरायडिज्म तब होता है जब आपका थायराइड पर्याप्त हार्मोन का उत्पादन नहीं करता है।

थायराइड रोग से कौन अधिक प्रभावित होता है?

थायराइड रोग किसी को भी प्रभावित कर सकता है। यह पुरुष, महिला, शिशु, किशोर और बुजुर्ग किसी को भी प्रभावित कर सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं की पुरुषों की तुलना में महिलाएं थायराइड की बीमारी से ज्यादा प्रभावित होती हैं। वास्तव में, महिलाओं को अपने जीवनकाल में थायराइड की बीमारी विकसित होने की संभावना पुरुषों से आठ गुना अधिक होती है।

आपको थायराइड रोग होने का अधिक खतरा हो सकता है यदि:

  • आपके परिवार में थाइरोइड का इतिहास रहा हो।
  • आप 60 वर्ष से अधिक उम्र के हैं, खासकर महिला हैं तो।
  • आपको कोई ऑटोइम्यून बीमारी है (जैसे टाइप 1 मधुमेह)
  • आपको थायराइड की समस्या का इतिहास रहा है, जैसे गण्डमाला (goiter)
  • आप भोजन या दवा के माध्यम से ज्यादा मात्रा में आयोडीन का सेवन कर रहे हैं।

थायराइड के कारण – Causes of thyroid in Hindi

थायराइड रोग के दो मुख्य प्रकार हैं हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म। यह दोनों प्रकार की स्थितियां अन्य बीमारी की वजह से हो सकती हैं जो थायरॉयड ग्रंथि के काम करने के तरीके को प्रभावित करती हैं।

हाइपोथायरायडिज्म निम्नलिखित कारणों से हो सकता है जिनमें शामिल हैं:

  • थाइरॉइडाइटिस (Thyroiditis) – थायरॉइडाइटिस थायरॉयड ग्रंथि में होने वाली सूजन को कहा जाता है। थायरॉइडाइटिस आपके थायरॉइड के हार्मोन की मात्रा को कम कर सकता है।
  • हाशिमोटो थाइरॉइडाइटिस (Hashimoto Thyroiditis) – हाशिमोटो थायरॉयडिटिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है जो थायरॉयड ग्रंथि की सूजन का कारण बनती है। यह बिना दर्द वाली बीमारी है जहां शरीर की कोशिकाएं थायरॉयड पर हमला करती हैं और उसे नुकसान पहुंचाती हैं। यह एक आनुवंशिक बीमारी है जो पीड़ी दर पीड़ी चलती है।
  • पोस्टपार्टम थायरॉयडिटिस (Postpartum thyroiditis) – यह एक ऐसी स्थिति है जो महिलाओं में प्रसव के बाद (बच्चे को जन्म देने के बाद) हो सकती है। ऐसा माना जाता है कि यह थायरॉयड ग्रंथि पर हमला करने वाली प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण होता है। यह स्थिति आमतौर पर अस्थायी होती है और खुद ठीक हो जाती है।
  • आयोडीन की कमी (Iodine deficiency) – आयोडीन एक आवश्यक खनिज है जो शरीर द्वारा थायराइड हार्मोन का उत्पादन करने के लिए आवश्यक होता है। आयोडीन सी फ़ूड, अंडे और डेयरी उत्पादों जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। कुछ देश आयोडीन की कमी को पूरा करने के लिए इसे नमक में भी मिलाते हैं।

हाइपरथायरायडिज्म निम्नलिखित कारणों से हो सकता है जिनमें शामिल हैं:

  • नोड्यूल्स (Nodules) – नोड्यूल्स थायरॉयड ग्रंथि में बनने वाली गांठें होती हैं। हाइपरथायरायडिज्म नोड्यूल्स के कारण हो सकता है जो थायरॉयड के अंदर बेहद सक्रिय होते हैं। नोड्यूल्स एक और एक से ज्यादा हो सकते हैं और पुरुषों और महिलाओं दोनों में हो सकता है लेकिन ये महिलाओं में अधिक पाया जाता है।
  • ग्रेव्स डिजीज (Grave’s disease) – ग्रेव्स रोग हाइपरथायरायडिज्म का सबसे आम कारण है। यह एक ऑटोइम्यून रोग है जिसके परिणामस्वरूप थायराइड हार्मोन का अधिक उत्पादन होता है। इस समस्या को डिफ्यूज टॉक्सिक गोइटर (बढ़ी हुई थायरॉयड ग्रंथि) भी कहा जाता है।
  • थाइरॉइडाइटिस (Thyroiditis) – थायरॉइडाइटिस थायरॉयड ग्रंथि की सूजन है। इसका सबसे आम प्रकार हाशिमोटो रोग है, जो एक ऑटोइम्यून रोग है। जबकि अन्य प्रकारों में वायरल, सबस्यूट (subacute) और प्रसवोत्तर थायरॉयडिटिस (postpartum thyroiditis) शामिल हैं।
  • अत्यधिक आयोडीन (Excessive iodine) – जरुरत से ज्यादा मात्रा में आयोडीन लेना हाइपरथायरायडिज्म का कारण बन सकता है। अत्यधिक आयोडीन से थायरॉयड ग्रंथि बहुत अधिक हार्मोन का उत्पादन करती है। अत्यधिक आयोडीन कुछ दवाओं जैसे मेथानामाइन मेंडेलेट (methenamine mandelate), मेथिमाज़ोल (Methimazole), पोटेशियम आयोडाइड (potassium iodide), और अन्य में पाया जाता है। इसके अलावा ये कफ सिरप में भी काफी मात्रा में पाया जा सकता है।

थायराइड के लक्षण – Symptoms of thyroid in Hindi

यदि आपको थायराइड की बीमारी है तो आप कई तरह के लक्षणों का अनुभव कर सकते हैं। थायराइड के लक्षण बहुत हद तक अन्य बीमारियों के लक्षणों से मिलते-जुलते हैं। इसलिए यह अंतर करना काफी मुश्किल होता है कि यह लक्षण थायराइड के हैं या पूरी तरह से कुछ और।

हाइपरथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म के कई अलग-अलग लक्षण होते हैं, और वे स्थिति की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं।

हाइपरथायरायडिज्म के कुछ सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • चिंता
  • अनिद्रा
  • वजन घटना
  • चिड़चिड़ापन
  • सोने में परेशानी होना
  • मांसपेशियों में कमजोरी और कंपकंपी होना।
  • दृष्टि संबंधी समस्याएं या आंखों में जलन होना।
  • अनियमित मासिक धर्म का अनुभव करना या  मासिक धर्म का चक्र बंद होना।

हाइपोथायरायडिज्म के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • थकान
  • वजन बढ़ना
  • अवसाद
  • रूखी त्वचा
  • बार-बार और भारी मासिक धर्म होना

थायराइड के उपचार – Thyroid treatment in Hindi

यदि आपको थायराइड की समस्या है, तो आपको यह जानने की जरुरत है की आहार और जीवन शैली के माध्यम से घर पर ही उनका इलाज कैसे किया जाए। न कि आपको खतरनाक दवाओं पर निर्भर रहना चाहिए जो आपके लीवर, हृदय और अन्य अंगों पर कहर बरपा सकती हैं।

इसे ध्यान में रखते हुए, थायराइड की समस्याओं के लिए यहां कुछ घरेलू उपचार दिए गए हैं जो आपकी थायराइड की समस्याओं को बेहतर ढंग से ठीक करने में आपकी मदद कर सकते हैं। यहाँ हाइपरथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म के घरेलु उपचारों के बारे में जानकारी दी गयी है।

हाइपरथायरायडिज्म के घरेलु उपचार – Home Remedies for hyperthyroidism

1. ब्राह्मी (Brahmi)

ब्राह्मी एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जिसका उपयोग सदियों से हाइपरथायरायडिज्म सहित कई प्रकार की स्थितियों के इलाज के लिए किया जाता रहा है। ब्राह्मी हाइपरथायरायडिज्म के लक्षणों को कम करने में प्रभावी है, जिसमें चिंता, धड़कन और अनिद्रा शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, ब्राह्मी थायराइड हार्मोन के स्तर को सामान्य करने और थायरॉयड ग्रंथि के आकार को कम करने में मदद कर सकती है। यदि आप अपने हाइपरथायरायडिज्म के इलाज के लिए एक प्राकृतिक तरीके की तलाश कर रहे हैं, तो आपको ब्राह्मी का उपयोग जरूर करना चाहिए। हाइपरथायरायडिज्म के लिए ब्राह्मी का उपयोग करने के लिए:

  • ब्राह्मी के कुछ पत्ते लें और उन्हें अच्छी तरह धो लें।
  • हाइपरथायरायडिज्म से राहत पाने के लिए रोजाना सुबह खाली पेट ब्राह्मी की ताजी पत्तियों का सेवन करें।
  • आप ब्राह्मी के पत्तों का पेस्ट भी बना सकते हैं या इसे सूखा के पाउडर के रूप में उपयोग कर सकते हैं।
  • एक गिलास पानी के साथ एक चम्मच पेस्ट या पाउडर का सेवन करें।

आप ब्राह्मी को कैप्सूल के रूप में भी ले सकते हैं जो मार्किट में आसानी से मिल जाती है। इसका उपयोग करने के लिए नाश्ते के साथ 2 कैप्सूल और रात के खाने के साथ 2 कैप्सूल लें। बेहतर परिणामों के लिए, कम से कम तीन महीने तक लेना चाहिए।

2. आंवला (Gooseberry)

आंवला हाइपरथायरायडिज्म के लिए एक बेहतरीन घरेलू उपाय है। आंवले में भरपूर मात्रा में विटामिन सी होता है जो थायराइड हार्मोन के उत्पादन को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा, आंवले में एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं जो थायरॉयड ग्रंथि की सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। हाइपरथायरायडिज्म के लिए आंवले का उपयोग करने के लिए:

  • 2 बड़े चम्मच आंवले का रस लें।
  • इसमें 1 बड़ा चम्मच शहद मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें।
  • इस मिश्रण का रोजाना सुबह नाश्ते से पहले सेवन करें।

यदि आपके पास आंवला चूर्ण है तो आप एक गिलास गर्म पानी में 1 चम्मच आंवले का पाउडर मिलाकर इसे दिन में दो बार पी सकते हैं। इसके अलावा, नियमित रूप से कच्चा या पका हुआ आंवला खाने से भी हाइपरथायरायडिज्म के लक्षणों से राहत मिल सकती है।

3. अश्वगंधा (Ashwagandha)

अश्वगंधा एक ऐसी जड़ी बूटी है जिसका उपयोग सदियों से आयुर्वेदिक चिकित्सा में किया जाता रहा है। यह पारंपरिक रूप से चिंता और तनाव के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है, लेकिन हाल के अध्ययनों से पता चला है कि यह हाइपरथायरायडिज्म के इलाज में भी प्रभावी हो सकता है। अश्वगंधा थायराइड हार्मोन के उत्पादन को रोकने का काम करता है, जो हाइपरथायरायडिज्म के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है।

हाइपरथायरायडिज्म के लिए अश्वगंधा का उपयोग करने के लिए:

  • बस एक कप गर्म पानी में 1 चम्मच अश्वगंधा पाउडर मिलाएं और रोजाना एक बार पिएं।

आप अश्वगंधा पाउडर की जगह कैप्सूल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं जो किसी भी मेडिकल स्टोर में आसानी से मिल जाती है। आप एक कैप्सूल रोज़ाना भोजन के साथ या सोने से पहले ले सकते हैं।

ध्यान रहे: यदि आप गर्भवती हैं, स्तनपान कराती हैं, दवा ले रही हैं, कोई चिकित्सीय स्थिति है, या किसी जड़ी-बूटी से एलर्जी है, तो इसे या कोई अन्य हर्बल सप्लीमेंट लेने से पहले हमेशा अपने चिकित्सक से परामर्श लें।

4. गुग्गल (Guggal)

गुग्‍गल एक महत्‍वपूर्ण जड़ी बूटी है जिसमें ढेर सारे औषधीय गुण होते हैं। गुग्गुल में गुग्गुलस्टेरोन होता है जो थायराइड हार्मोन के उत्पादन को नियंत्रित करने में मदद करता है और थायरॉइड ग्रंथि के आकार को कम करता है। इसके अतिरिक्त, यह वजन घटाने, चिंता और थकान जैसे हाइपरथायरायडिज्म के लक्षणों को सुधारने में भी मदद कर सकता है।

हाइपरथायरायडिज्म के लिए गुग्गल का उपयोग करने के लिए, आप इसे कैप्सूल के रूप में ले सकते हैं या सूखे जड़ी बूटी का उपयोग करके इसकी चाय बना सकते हैं।

अगर आप गुग्गल को कैप्सूल के रूप में ले रहे हैं तो भोजन से पहले प्रति दिन दो बार एक गोली लेने से शुरू करें और धीरे-धीरे तीन गोलियों तक बढ़ाएं।

यदि आप इसकी चाय बना रहे हैं, तो दो चम्मच सूखे गुग्गल को 10 मिनट के लिए गर्म पानी में भिगोएं और भोजन से पहले प्रति दिन एक कप पिएं।

ध्यान रहे: आपको कम खुराक से शुरू करना चाहिए और समय के साथ इसे धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए।

5. नारियल का तेल (Coconut oil)

हाइपरथायरायडिज्म के इलाज में नारियल का तेल बेहद कारगर होता है। नारियल का तेल थायराइड हार्मोन के उत्पादन को नियंत्रित करने में और इससे जुड़ी सूजन को कम करने में मदद करता है। नारियल का तेल प्रतिरक्षा प्रणाली को भी बढ़ाता है, जो संक्रमण से लड़ने में मदद कर सकता है। किसी भी प्रकार का संक्रमण हाइपरथायरायडिज्म की स्थिति को और खराब कर सकता है।

हाइपरथायरायडिज्म के लिए नारियल तेल का उपयोग करने के लिए:

  • 2 बड़े चम्मच नारियल का तेल लें।
  • उसे एक गिलास दूध में मिलाएं।
  • रोजाना दो बार इसका सेवन करें।

आप इसे अपने खाने में शामिल कर सकते हैं या सीधे चम्मच से भी ले सकते हैं। लक्षणों से राहत मिलने तक इसका लगातार दो चम्मच रोजाना सेवन करते रहें।

हाइपरथायरायडिज्म के कुछ प्राकृतिक उपचार भी हैं जो लक्षणों को कम करने में आपकी मदद कर सकते हैं जैसे:

  • उबली हुई सब्जियां खाना
  • खूब पानी पीना
  • रोजाना व्यायाम करना
  • कैफीन या आयोडीन वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करना

हाइपोथायरायडिज्म के प्राकृतिक उपचार – Natural Remedies for hypothyroidism

हाइपोथायरायडिज्म के लक्षणों को कम करने के कई प्राकृतिक तरीके हैं।

1. संतुलित प्राकृतिक आहार लें (Eat a Balanced Natural Diet)

हाइपोथायरायडिज्म से पीड़ित लोगों के लिए संतुलित आहार लेना बहुत आवश्यक है। सही खाद्य पदार्थ लेना हार्मोन के स्तर को नियंत्रित करने और लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। हाइपोथायरायडिज्म थकान, वजन बढ़ने और अवसाद सहित कई अन्य लक्षण पैदा कर सकता है। एक स्वस्थ आहार इन लक्षणों को कम करने और आपके संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

भरपूर मात्रा में ताजे फल और सब्जियां, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन खाएं। प्रोसेस्ड फूड, आर्टिफिशियल स्वीटनर और कैफीन से बचें। भरपूर आराम करें और अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और अपनी ऊर्जा के स्तर को ऊपर रखने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें।

2. सेलेनियम (selenium)

सेलेनियम एक खनिज है जो मिट्टी और खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। यह हमारे मेटाबोलिज्म (metabolism) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, और यह थायरोक्सिन (thyroxine) को ट्राईआयोडोथायरोनिन (triiodothyronine) में परिवर्तित करने में मदद करता है।

सेलेनियम हाइपोथायरायडिज्म वाले लोगों के लिए फायदेमंद होता है, क्योंकि यह थायरॉयड ग्रंथि के कार्य को बेहतर बनाने में मदद करता है। ऐसे कई खाद्य पदार्थ हैं जिनमें सेलेनियम होता है, जैसे ब्राजील नट्स, टूना, झींगा और अंडे।

3. विटामिन बी (Vitamin B)

हाइपोथायरायडिज्म के उपचार के लिए विटामिन बी एक महत्वपूर्ण विटामिन है। यह विटामिन चयापचय (Metabolism) को नियंत्रित करने में मदद करता है और अंडे, मांस, और डेयरी उत्पादों जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है।

आपको अपने आहार में पर्याप्त आयोडीन का सेवन करना बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह थायरॉयड ग्रंथि के कार्य को बेहतर बनाने में मदद करता है। विटामिन बी की कमी से हाइपोथायरायडिज्म हो सकता है, इसलिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि आपको यह पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिल रहा है। आप निम्नलिखित खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल कर सकते हैं जो विटामिन बी से भरपूर हैं:

  • मटर और बीन्स
  • तिल के बीज
  • टूना
  • पनीर
  • दूध
  • अंडे

4. प्रोटीन का सेवन बढ़ाएं (Increase protein intake)

यदि आपको हाइपोथायरायडिज्म है, तो आपको प्रोटीन का सेवन बढ़ाने की आवश्यकता हो सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आपके थायरॉयड ग्रंथि को थायराइड हार्मोन का उत्पादन करने के लिए प्रोटीन में पाए जाने वाले अमीनो एसिड की आवश्यकता होती है।

हरी सब्जियां, अंडे, मांस और फलियां प्रोटीन से भरपूर होती हैं जो हाइपोथायरायडिज्म के लक्षणों से लड़ने में मदद कर सकते हैं।

5. सेब का सिरका (Apple cider vinegar)

सेब का सिरका हाइपोथायरायडिज्म सहित कई अन्य बीमारियों के लिए एक लोकप्रिय प्राकृतिक उपचार है। हालांकि इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। कुछ लोगों का मानना है कि सेब का सिरका थायराइड हार्मोन उत्पादन को बढ़ाने में मदद कर सकता है।

इस उपाय को आजमाने के लिए एक चम्मच सेब के सिरके को पानी में मिलाकर रोजाना पिएं। सुरुवात में इसे कम मात्रा में लें , क्योंकि बहुत अधिक सिरका मतली और अपच जैसे दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है।

6. व्यायाम (Exercise)

व्यायाम हमारे स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होता है, लेकिन यदि आपको हाइपोथायरायडिज्म है तो यह आपके लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब आपका थायरॉयड ठीक से काम नहीं कर रहा होता है, तो आपका मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और आपका वजन बढ़ना शुरू हो सकता है।

व्यायाम आपके चयापचय (Metabolism) और आपके मूड को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसके अलावा व्यायाम आपके शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है और स्वस्थ वजन बनाए रखता है।

यदि आपको डायबिटीज है तो आपको अपने ब्लड शुगर को नियंत्रित करना बेहद जरुरी है। क्योंकि मधुमेह रोगियों हाई ब्लड शुगर के स्तर के कारण थायराइड रोग विकसित होने का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है। हाई ब्लड शुगर का स्तर थायरॉयड ग्रंथि को नुकसान पहुंचा सकता है और इसे पर्याप्त हार्मोन का उत्पादन करने से रोक सकता है। तो जरुरी है की आप अपने डायबिटीज को कंट्रोल करें। डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए हमारा लेख डायबिटीज को कंट्रोल करने का रामबाण इलाज  पढ़ें।

ऊपर बताये गए सभी घरेलू उपचार हाइपरथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म के लक्षणों को कम करने में आपकी मदद कर सकते हैं। हालांकि, इन उपायों को अपनाने के साथ-साथ चिकित्सक द्वारा निर्धारित उपचारों का भी पालन करें। यदि आप थायराइड की समस्याओं के लिए दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं तो किसी भी घरेलु व प्राकृतिक उपचार का पालन करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

Herb Home Cure
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