Skin Pigmentation: जानें क्या है स्किन पिगमेंटेशन, इसके प्रकार, कारण और उपचार

खूबसूरत दिखना किसे पसंद नहीं होता। हर कोई अपनी त्वचा को खूबसूरत बनाये रखने के लिए न जाने क्या-क्या करता है। लेकिन कई बार लोगों को त्वचा संबंधी कई समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। ऐसी ही एक त्वचा संबंधी समस्या है पिगमेंटेशन। लेकिन वास्तव में पिगमेंटेशन क्या है?, यह कितने प्रकार का होता है और किस कारण से होता है। किस तरह इसका इलाज किया जा सकता है (How to treat skin pigmentation), इस लेख में हम इन सभी विषयों पर चर्चा करेंगे।

पिगमेंटेशन क्या है? – What is skin pigmentation in Hindi?

पिगमेंटेशन (रंजकता) त्वचा पर पड़ने वाले धब्बे होते हैं जो गहरे रंग के होते हैं। इसमें त्वचा के कुछ हिस्से अन्य हिस्सों की तुलना में काले या गहरे रंग के हो जाते हैं। इसके अलावा कई बार त्वचा में काले रंग के धब्बे भी पड़ जाते हैं। ऐसा तब होता है जब त्वचा में मेलेनिन का स्तर बढ़ जाता है। मेलेनिन एक प्रकार का प्राकृतिक रंगद्रव्य (पिगमेंट) है जो त्वचा को रंग देता है।

पिगमेंटेशन किसी भी उम्र में और किसी भी प्रकार की त्वचा के लोगों को हो सकता है। यह त्वचा के छोटे से लेकर बड़े हिस्सों में हो सकता है। हालांकि पिगमेंटेशन हानिकारक नहीं होता है, लेकिन कुछ मामलों में यह किसी अन्य चिकित्सा स्थिति का संकेत भी हो सकता है।

पिगमेंटेशन कितने प्रकार के होते हैं? – What are the Types of Pigmentation in Hindi

पिगमेंटेशन मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं, हाइपोपिगमेंटेशन और हाइपरपिग्मेंटेशन।

  • हाइपरपिग्मेंटेशन: हाइपरपिग्मेंटेशन एक ऐसी स्थिति है जिसके कारण आपकी त्वचा का एक हिस्सा अन्य हिस्सों की तुलना में काले रंग का हो जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण त्वचा में मेलेनिन का बढ़ना है। हाइपरपिग्मेंटेशन आपके चेहरा, गर्दन, छाती, हाथ, बाहों सहित शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है।
  • हाइपोपिगमेंटेशन: हाइपोपिगमेंटेशन तब होता है जब त्वचा अपना रंग खो देती है और हलके रंग की हो जाती है। यह त्वचा में मेलेनिन की कमी के कारण होता है। मेलेनिन की कमी कई कारणों से हो सकती है जैसे लंबे समय तक धूप में रहना या विटिलिगो जैसी स्थिति से।

पिगमेंटेशन कुछ अन्य प्रकार के भी होते हैं जैसे मेलास्मा, रंगहीनता (अल्बाइनिज्म) और पोस्ट-इंफ्लेमेटरी हाइपरपिग्मेंटेशन।

मेलास्मा

मेलास्मा यानी झाइयां त्वचा की एक सामान्य समस्या है जो आमतौर पर महिलाओं में देखी जाती है। इसमें त्वचा में भूरे रंग के निशान पड़ जाते हैं जो गले, माथे या ऊपरी होंठ के आसपास की त्वचा पर दिखाई देते हैं। मेलास्मा शरीर में हार्मोनल परिवर्तन जैसे गर्भावस्था या हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी शुरू करने के कारण होता है। इसके अलावा यह कुछ दवाओं के उपयोग के बाद या सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने के बाद भी विकसित हो सकता है।

रंगहीनता (अल्बाइनिज्म)

ऐल्बिनिज़म एक ऐसा रोग है जिसमें त्वचा, बाल या आँखों का रंग बहुत कम या बिल्कुल भी नहीं होता है। यह एक अनुवांशिक रोग है जो माता-पिता से बच्चों में फैलता है और बहुत ही कम लोगों में देखा जाता है। अगर किसी व्यक्ति को ऐल्बिनिज़म है, तो उसे टैनिंग में परेशानी होती है क्योंकि उसकी त्वचा में सामान्य मात्रा में मेलेनिन का उत्पादन नहीं होता है। मेलेनिन त्वचा को सूरज की हानिकारक यूवी किरणों से बचाने के लिए आवशयक होता है। ऐल्बिनिज़म का कोई इलाज नहीं है, हालांकि इसमें त्वचा, बाल और आँखों की देखभाल करना जरुरी होता है क्योंकि इस स्थिति में स्किन कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।

पोस्ट-इंफ्लेमेटरी हाइपरपिग्मेंटेशन

पोस्ट-इंफ्लेमेटरी हाइपरपिग्मेंटेशन सूजन के कारण होने वाली त्वचा की एक आम समस्या है। इसे मुंहासों के निशान और दाग-धब्बे वाले मुंहासे भी कहते हैं। ये त्वचा पर वे लाल या भूरे रंग के धब्बे होते हैं जो पिंपल्स, चोट, कट या जले के ठीक होने के बाद पीछे रह जाते हैं।

पिगमेंटेशन के कारण – Causes of Pigmentation in Hindi

पिगमेंटेशन कई कारणों से हो सकता है। लेकिन इसका एक सबसे मुख्य कारण मुख्य सूरज की किरणों का सीधा संपर्क में आना है। आमतौर पर, 70 से 80 प्रतिशत पिगमेंटेशन सूर्य से निकलने वाली यूवी किरणों के कारण होता है। इसके अलावा, कुछ दवाएं, हार्मोनल असंतुलन, और एडिसन रोग जैसी स्थितयों के कारण भी पिगमेंटेशन हो सकता है।

पिगमेंटेशन से कैसे बचाव करें? – How to Prevent from Pigmentation in Hindi

पिगमेंटेशन से बचने का सबसे पहला तरीका है धूप के सीधे संपर्क में आने से बचना। खासकर सुबह 11 से दोपहर 2 बजे के बीच। पिगमेंटेशन होने का सबसे मुख्य कारण धूप ही है। अगर आप धूप में निकलते भी हैं तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे;

  • अपने शरीर को ढकें: धूप में बाहर निकलने से पहले अपने शरीर को कपड़ों से अच्छे से ढकें। टोपी, स्कार्फ और धूप वाले चश्मे का इस्तेमाल भी करें। और अधिक सुरक्षा के लिए धूप में जाते समय हमेशा छाता लेकर जाएं।
  • सनस्क्रीन लगाएं: अपनी त्वचा को हानिकारक यूवी किरणों से बचाने के लिए सनस्क्रीन का उपयोग करें जो कम से कम 30 एसपीएफ़ हो। आप Fixderma शैडो सनस्क्रीन को भी आजमा सकते हैं। यह 30 एसपीएफ़ वाली एक बेहतरीन मॉइस्चराइज़ क्रीम है जो यूवी किरणों से कई घंटो तक त्वचा को सुरक्षा देती है।
  • खूब पानी पिएं: धूप में बहार निकलने से पहले कम से कम 2 गिलास पानी जरूर पिएं। पानी शरीर के साथ-साथ त्वचा को भी हाइड्रेट रखता है।

पिगमेंटेशन के घरेलू उपचार – Home Remedies for Pigmentation in Hindi

पिगमेंटेशन से छुटकारा पाने के लिए कई ऐसे घरेलु उपचार हैं जो काफी असरदार हैं। आइये जानते हैं वे कोनसे उपाय हैं जिनकी मदद से आप पिगमेंटेशन को दूर कर सकते हैं।

हल्दी

पिगमेंटेशन के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाल घरेलू उपचार हल्दी है। हल्दी में करक्यूमिनोइड्स होता है जो अपनी एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण के लिए जाना जाता है। यह सन स्पॉट्स को कम करने में मदद करता है। हल्दी सभी प्रकार की त्वचा के लिए सुरक्षित होती है। इसको इस्तेमाल करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप रोज़ाना सुबह उठकर इसकी चाय पीएं। आप इसको सीधे अपनी त्वचा पर भी लगा सकते हैं लेकिन ध्यान रखें कि आपको इससे एलर्जी न हो।

कच्चा आलू

आलू त्वचा पिगमेंटेशन को कम करने का एक सबसे बढ़िया प्राकृतिक तरीका है। आलू में विटामिन ए और सी होता है जो काले धब्बों को दूर करने में मदद करता है। और इसे पिगमेंटेशन के लिए इस्तेमाल करना भी बहुत आसान है। बस एक आलू को छीलकर उसे अपनी त्वचा पर लगभग 15 मिनट तक हलके-हलके मलें और फिर धो लें। इसे दिन में कम से कम 2 बार दोहराएं।

नींबू और शहद

शहद और नींबू काले दाग-धब्बों को दूर करने में काफी असरदार होते हैं। नींबू में भरपूर मात्रा में विटामिन सी और साइट्रिक एसिड होता है। ये दोनों ऐसे मुख्य तत्व हैं जिनका उपयोग कई उत्पादों में किया जाता है जो काले धब्बों के इलाज के लिए बेहद प्रभावशाली होते हैं। इस उपाय को इस्तेमाल करने के लिए 1-1 चम्मच नींबू के रस और शहद को एक साथ मिलाएं। अब इस मिश्रण को त्वचा पर कम से कम 15 मिनट के लिए लगाएं और फिर धो लें।

मसूर दाल

आप लोगों में से बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि मसूर दाल का फेस मास्क पिगमेंटेशन के इलाज के लिए किया जा सकता है। लाल मसूर में काफी मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट होता है जो त्वचा के लिए एक वरदान है। यह एक एक्सफ़ोलीएटर के रूप में काम करता है और निशान, धब्बे और पिगमेंटेशन को हल्का करने में मदद करता है। अगर आप इसे नियमित रूप से अपनी त्वचा पर लगाते हैं, तो आपको कुछ ही दिनों में इसका असर आपकी त्वचा पर दिखने लगेगा। इसे तैयार भी काफी आसान है। मसूर दाल का मास्क बनाने के लिए:

  • 50 ग्राम लाल मसूर को एक कटोरी पानी में रात भर भीगने को रख दें।
  • सुबह मिक्सर में इसका पेस्ट बना लें।
  • अब पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं और 20 मिनट के लिए छोड़ दें।
  • अंत में अपनी त्वचा को ठंडे पानी से धो लें और तौलिये से थपथपा कर सुखा लें।

प्याज

प्याज का रस पिगमेंटेशन के सबसे पुराने उपचारों में से एक है। शायद आपमें से बहुत कम लोग जानते होंगे कि प्याज के रस को दाग-धब्बों को ठीक करने वाली क्रीम में इस्तेमाल किया जाता है। इसको इस्तेमाल करने के लिए एक प्याज से रस को निकाल लें और इसे रस सीधे अपनी त्वचा के प्रभावित क्षेत्रों पर लगाएं। इस प्रक्रिया को हर दिन कम से कम दो सप्ताह तक दोहराएं जब तक आपको इसके परिणाम नहीं मिलते।

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निष्कर्ष

अक्सर कुछ पिगमेंटेशन को घर पर ही ठीक किया जा सकता है और कुछ मामलों में दवाओं की भी जरूरत पड़ती है। हालांकि आप ऊपर दिए गए नुस्खों को आजमा सकते हैं और दवाओं के दुष्प्रभावों से बच सकते हैं। ये सभी नुस्खें बेहद प्रभावी हैं और हमारे द्वारा इनका परीक्षण किया गया है।

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