हलके में न लें फैटी लिवर को: जानिए इसके कारण, लक्षण और उपचार

लिवर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। जब आप भोजन खाते हैं तो आपका लिवर भोजन से फैट को तोड़ता है ताकि इसे शरीर में ऊर्जा के लिए इस्तेमाल किया जा सके। फैटी लिवर या हेपेटिक स्टीटोसिस एक ऐसी स्थिति है जो तब विकसित होती है जब लिवर की कोशिकाओं में बहुत अधिक वसा या फैट जमा हो जाता है। यह अतिरिक्त फैट आपके लिवर में ट्राइग्लिसराइड्स के रूप में जमा होता है। लिवर में बहुत अधिक फैट जमा होने से लिवर में सूजन आ सकती है, जो आपके लिवर को नुकसान पहुंचा सकती है।

फैटी लिवर हेल्दी लिवर

 

वैसे तो फैटी लिवर की बीमारी ज्यादातर लोगों के लिए कोई बड़ी समस्या पैदा नहीं करती है। हालांकि, अगर यह सिरोसिस में बदल जाती है तो यह और भी गंभीर समस्या पैदा कर कर सकती है। लिवर सिरोसिस लिवर की एक घातक बीमारी है जिसमें लिवर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाता है।

फैटी लिवर रोग के प्रकार – Types of Fatty Liver Disease in Hindi

फैटी लिवर रोग के दो मुख्य प्रकार हैं: नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) और अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (AFLD)

NAFLD एक प्रकार का फैटी लिवर रोग है जो अधिक शराब के सेवन से नहीं होता है। NAFLD भी दो प्रकार के होते हैं:

  • सिंपल फैटी लिवर: यह NAFLD का एक रूप है जो लिवर की कोशिकाओं में फैट के निर्माण के कारण होता है। हालांकि, इसमें आपके लिवर में फैट तो होता है लेकिन उसमें बहुत कम या किसी तरह की कोई सूजन नहीं होती है। साथ ही लिवर की कोशिकाएं भी क्षतिग्रस्त नहीं होती हैं। साधारण फैटी लिवर आमतौर पर इतना खराब नहीं होता है कि लिवर को किसी तरह का नुकसान पहुचाएं।
  • नॉन एल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (NASH): NASH साधारण फैटी लिवर से कहीं अधिक गंभीर है। यह तब होता है जब लिवर में अतिरिक्त फैट जमा होने के साथ सूजन हो जाती है और लिवर की कोशिकाएं भी क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। यह लिवर की एक गंभीर बीमारी है जो अंत में सिरोसिस और लिवर कैंसर का कारण बन सकती है।

AFLD उन लोगों में होता है जो कई वर्षों से बहुत भारी मात्रा में शराब पीते आ रहे हैं। शराबियों में अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग विकसित होने का बहुत अधिक जोखिम होता है। लिवर का काम शराब को तोड़ना होता है ताकि वह शरीर से बहार निकल सके। लेकिन इस प्रक्रिया में ट्राइग्लिसराइड्स जैसे अन्य हानिकारक पदार्थ उत्पन्न होते हैं जो हमारे लिवर की कोशिकाओं को नुक्सान पहुंचते हैं।

हालांकि, अल्कोहलिक फैटी लिवर की बीमारी को ठीक किया जा सकता है। जब आप शराब पीना बंद कर देते हैं तो लिवर में जमा फैट कुछ ही हफ्तों में अपने आप निकल जाता है। लेकिन अगर आप इसे पीना बंद नहीं करते हैं तो यह अल्कोहलिक हेपेटाइटिस और सिरोसिस का कारण बन सकता है।

फैटी लिवर के लक्षण – Fatty Liver Symptoms in Hindi

फैटी लिवर की बीमारी के साथ समस्या यह है कि जिन लोगों को यह होता है उन्हें इसके बारे में बिलकुल भी पता नहीं चलता। ऐसा इसलिए है क्योंकि फैटी लिवर रोग के कोई शुरुआती लक्षण नहीं होते हैं।

यहां तक कि कई मामलों में, यदि आपको AFLD या NAFLD है, तो हो सकता है कि आपको कोई लक्षण दिखाई न दें। लेकिन कुछ लोगों को पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में जहां आपका लिवर है वहां दर्द और बेचैनी का अनुभव हो सकता है। साथ ही थकान भी हो सकती है।

हालांकि, यदि किसी व्यक्ति को NASH या सिरोसिस हो जाता है, तो उसे निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं:

  • पेट में दर्द
  • पेट में सूजन
  • भूख न लगना
  • वजन कम होना
  • आसानी से खून बहना या चोट लगना
  • कमजोरी या थकान
  • मितली
  • त्वचा में खुजली होना
  • पैरों और टखनों में सूजन आना
  • त्वचा और आखें पीली पड़ना (पीलिया)

एक बार सिरोसिस होने पर लिवर पूरी तरह से ख़राब हो जाता है और इसे ठीक नहीं किया जा सकता। इसलिए इस गंभीर स्थिति को होने से रोकना बहुत महत्वपूर्ण है।

फैटी लिवर के कारण – Causes of Fatty Liver Disease in Hindi

AFLD का कारण स्पष्ट रूप से बहुत अधिक शराब पीना है। जबकि NAFLD वाले लोगों में, फैटी लिवर रोग का कारण स्पष्ट नहीं है। शायद एक कारण हो सकता है की उनका शरीर बहुत अधिक फैट पैदा करता है या फैट को ठीक से मटैबलाइज़ नहीं कर पाता। लेकिन शोधकर्ताओं के अनुसार, कई अन्य कारक भी हो सकते हैं जो NAFLD का कारण बन सकते हैं जैसे:

  • मोटापा
  • आनुवांशिकता
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • टाइप 2 मधुमेह और प्रीडायबिटीज
  • खून में फैट का स्तर ज्यादा होना , विशेष रूप से ट्राइग्लिसराइड्स और कोलेस्ट्रॉल
  • मेटाबॉलिक सिंड्रोम
  • हेपेटाइटिस सी या अन्य संक्रमण
  • ग्लूकोकार्टिकोइड्स, मेथोट्रेक्सेट, सिंथेटिक एस्ट्रोजन, टैमोक्सीफेन जैसी कुछ अन्य दवाओं का लम्बे समय तक सेवन करना

फैटी लिवर का पता कैसे लगाया जाता है? – How is fatty liver diagnosed in Hindi?

क्योंकि फैटी लिवर में अक्सर कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं तो इसका पता खुद से लगाना थोड़ा मुश्किल होता है। फैटी लिवर का पता केवल डॉक्टर द्वारा शारीरिक और रक्त परिक्षण से ही लगाया जा सकता है। इसके अलावा डॉक्टर आपसे कुछ सवाल भी पूछ सकता है जैसे:

  • आपका पारिवारिक चिकित्सा इतिहास, जैसे कि आपके माता-पिता या दादा-दादी को लिवर की बीमारी का इतिहास रहा हो।
  • आपकी शराब का सेवन, खानपान और जीवन शैली।
  • वह आपसे यह भी पूछ सकता है कि आप कौन सी दवाएं ले रहे हैं।

शारीरिक परिक्षण के दौरान डॉक्टर आपके वजन की जांच करता है की आपका वजन अधिक तो नहीं है। वह आपके पेट को दबा कर आपके लिवर की भी जांच करता है की वह कितना बढ़ा हुआ है।

कुछ मामलों में, यदि डॉक्टर को लगता है कि आपको सिरोसिस का खतरा हो सकता है, तो वह लिवर बायोप्सी की भी सिफारिश कर सकता है। लिवर बायोप्सी में, डॉक्टर आपके लिवर के टिश्यू का एक छोटा सा नमूना निकालता है और इसे लिवर सिरोसिस के परीक्षण के लिए लैब में भेजता है।

फैटी लिवर रोग का उपचार – Fatty Liver Disease Treatment in Hindi

जैसा की आप जानते हैं कि फैटी लिवर दो प्रकार के होते हैं: अल्कोहलिक फैटी लिवर और नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर। अल्कोहलिक फैटी लिवर को केवल शराब का सेवन बंद करके ही ठीक किया जा सकता है। जबकि नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर (NAFLD) के इलाज के लिए वर्तमान में कोई दवा उपलब्ध नहीं है। इसे केवल खानपान और जीवन शैली में बदलाव कर के ही ठीक किया जा सकता है।

तो आइए जानते हैं कि कैसे खान-पान और जीवनशैली में बदलाव करके NAFLD को ठीक किया जा सकता है।

अतिरिक्त वजन घटाएं

अधिक वजन बढ़ना या मोटा होना फैटी लिवर होने का एक सबसे बड़ा कारण है। यदि आप मोटे हैं या आपके लिवर में अतिरिक्त चर्बी जमा है, तो आप फैटी लिवर की बीमारी से पीड़ित हो सकते हैं।

अमेरिकन एसोसिएशन फॉर स्टडी ऑफ लिवर डिजीज (AASLD) ने अपनी एक गाइड में उल्लेख किया है कि मोटे लोगों को लिवर में फैट कम करने के लिए अपने शरीर के वजन का कम से कम 3 से 5 प्रतिशत कम करना चाहिए।

AASLD यह भी बताते हैं कि शरीर के वजन का लगभग 7-10% कम करने से NAFLD के अन्य लक्षणों जैसे सूजन, फाइब्रोसिस और निशान में सुधार हो सकता है।

इसलिए यदि आप मोटे हैं तो आपको अपने वजन को घटने के बारे में सोचना चाहिए। वजन कम करने के लिए आप हमारा लेख Weight Loss Tips in Hindi – अब बिना मेहनत किये तेजी से वजन घटाएं भी पढ़ सकते हैं।

नियमित व्यायाम करें

एक स्वस्थ जीवन शैली पाने के लिए व्यायाम करना महत्वपूर्ण है। यदि आप बहुत अधिक खाते हैं और व्यायाम नहीं करते हैं, तो अतिरिक्त कैलोरी फैट में बदल जाती है।

कुछ मामलों में, भले ही आप स्वस्थ भोजन करते हैं और ज्यादा नहीं खाते हैं, फिर भी आपके शरीर में फैट अन्य स्रोतों जैसे शराब, तले हुए खाद्य पदार्थ आदि से आ सकता है। इसलिए व्यायाम करना फैट बर्न करने का सबसे कारगर तरीका है ताकि फैट आपके लिवर में जमा न हो।

यदि आपको NAFLD है तो आपको हर दिन लगभग 30 मिनट का माध्यम व्यायाम करना बेहद महत्वपूर्ण है। हालाँकि, आपको व्यायाम करने के लिए जिम जाने की ज़रूरत नहीं है। आप इससे बेहतर जॉगिंग या ब्रिस्क वाकिंग भी कर सकते हैं।

शराब का सेवन कम करें

फैटी लिवर से निपटने का एक अच्छा तरीका शराब का सेवन कम करना है। शराब लिवर के लिए जहरीली होती है। अधिक मात्रा में शराब पीने से लिवर खराब हो सकता है और हेपेटाइटिस बी और लिवर सिरोसिस का खतरा बढ़ सकता है। यदि आप शराब पीना बंद कर देते हैं, तो आपका लिवर कुछ ही हफ्तों में सामान्य हो जाता है और उसमें जमा अतिरिक्त फैट निकल जाता है।

इसलिए यदि आप शराब पीते हैं तो उसका सेवन बंद कर दें या उसका नियंत्रित सेवन करें। यदि आप शराब का सेवन कम करना चाहते हैं तो आप हमारा लेख Tapering Off Alcohol – शराब छुड़ाने का असरदार और सुरक्षित तरीका पढ़ सकते हैं।

मेडिटेरेनियन डाइट

प्लांट बेस्ड डाइट को मेडिटेरेनियन डाइट कहा जाता है। इसमें हर तरह की पत्तेदार सब्ज़िया, ताज़े फल, अनाज शामिल होते हैं। मेडिटेरेनियन डाइट भोजन की एक ऐसी शैली है जिससे आपके लिवर से फैट को कम करने में मदद मिलती है। इस शैली में उन खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाता है जिनमें भरपूर मात्रा में हेल्दी फैट, एंटीऑक्सिडेंट और कार्बोहाइड्रेट शामिल होते हैं।

कुछ अध्यनों में यह पाया गया है की मेडिटेरेनियन डाइट फैटी लिवर को कम करने में मदद कर सकती है। यहां कुछ खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें आप अपने आहार में शामिल कर सकते हैं:

  • मछली और अन्य सीफ़ूड
  • सभी फल
  • सब्ज़ियां
  • नट्स जैसे काजू, बादाम, किशमिश आदि,
  • साबुत अनाज जैसे गेहूं का आटा, बाजरा, जोआर, मकई, जौ, आदि
  • एवोकैडो
  • ओलिव आयल
  • फलियां जैसे छोले, हरी मटर, राजमा, आदि

अपने डायबिटीज को नियंत्रित करें

क्या आप जानते हैं कि मधुमेह से NAFLD का खतरा बढ़ जाता है? हाँ, क्योंकि हाई ब्लड शुगर का स्तर लिवर को फैट संसाधित यानी प्रोसेस करने से रोकता है जिससे लिवर की कोशिकाएं फैट का उत्पादन करती हैं। यह फैट लिवर में जमा हो जाता है और इसे नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहा जाता है।

इसलिए अगर आपको डायबिटीज है तो यह बहुत जरुरी हो जाता है की आप अपने डायबिटीज को नियंत्रित करें। समय समय पर अपने ब्लड शुगर के स्तर की जांच करें और डॉक्टर के निर्देशानुसार अपनी दवा लें। यदि आप डायबिटीज को नियंत्रित करना चाहते हैं तो हमारा लेख डायबिटीज को कंट्रोल करने का रामबाण इलाज – आजमाएं ये आयुर्वेदिक उपाय पढ़ें।

डॉक्टर को कब दिखाना है?

जैसा की आप जानते हैं की शुरुआती चरणों में फैटी लिवर के लक्षण अनुभव नहीं होते हैं। इसलिए कई लोगों को इसके बारे में पता ही नहीं होता की उन्हें फैटी लिवर रोग है। और समय के साथ उनकी बीमारी गंभीर होती जाती है। इसलिए यदि आपके परिवार में किसी को लिवर रोग है या आपका बहुत अधिक शराब पीते हैं तो हर तीन महीने में एक बार अपने लिवर की जांच अवश्य करवाएं।

इसके अतिरिक्त, यदि आप किसी ऐसे लक्षण का अनुभव करते हैं जो फैटी लीवर के लक्षणों के समान या उससे अलग भी है, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

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