कितने कदम चलना सही है? – Do You Really Need to Walk 10000 Steps a Day?

क्या आप भी फिटनेस बैंड इस्तेमाल करते हैं?, क्या आप भी रोज़ 10 हज़ार कदम चलने का लक्ष्य रखते हैं?, क्या आप भी चल चल कर अपनी एड़ियां घिस रहे हैं? यह सभी सवाल आपको शायद टीवी में दिखाए जाने वाले विज्ञापन की तरह लग रहे होंगे। क्योंकि उन विज्ञापन के चक्कर में ही तो आप रोज़ दस-दस हज़ार कदम चल रहे हैं। वरना डॉक्टरों ने तो कभी दावा नहीं किया की स्वस्थ रहना है तो इतना चलिए। तो आखिर कितने कदम चलना चाहिए?

आइए जानते हैं कि फिटनेस विशेषज्ञ के अनुसार रोजाना कितने कदम चलना सेहत के लिए अच्छा हो सकता है।

कितने कदम चलें?

बच्चा जब अपना पहला कदम उठाता है तो हम कितने उत्साहित होते हैं, है न?। बस उस दिन के बाद से हम चलते ही चले जाते हैं। फिटनेस विशेषज्ञ कहते हैं की एक दिन में कम से कम 7,500 कदम चलना चाहिए। यानी दिनभर में करीब 6 किलोमीटर।

हर दिन 7500 कदम चलने के लाभ – Health benefits of 10000 steps a day:

यदि आप चलना पसंद नहीं करते तो, आपको शायद इसके बारे में एक बार विचार करना चाहिए। चलना न केवल एक अच्छा व्यायाम है, बल्कि यह आपके मन और शरीर को कई अन्य तरीकों से भी मदद कर सकता है। हर दिन 7500 कदम चलने के कुछ सबसे सामान्य लाभ इस प्रकार हैं:

  • आपकी गतिशीलता बढ़ता है – प्रतिदिन 7,500 कदम चलने से गतिशीलता और संतुलन में सुधार होता है।
  • वजन घटने में मदद करता है – चलना कैलोरी बर्न करने और वजन कम करने का एक शानदार तरीका है। यदि आप कुछ किलो वजन कम करने का प्रयास कर रहे हैं, तो अपना लक्ष्य 7,500 कदम चलने का रखें।
  • फोकस बढ़ता है – यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में पाया गया कि पैदल चलने से आपका ध्यान 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। फोकस बढ़ने से आपको बेवजह गलतियाँ करने से बचने में मदद मिलेगी, जैसे काम को नज़रअंदाज़ करना या काम पर गलत निर्णय लेना।
  • बेहतर ब्रेन फंक्शन – कई शोधों में पाया गया है की प्रतिदिन 7500 कदम चलने से दिमाग के काम करने की क्षमता बढ़ जाती है और मनोभ्रंश (dementia) विकसित होने की संभावना 47 प्रतिशत कम हो जाती है।
  • लो ब्लड प्रेशर – लो ब्लड प्रेशर से हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। कई शोधों से पता चला है कि हर दिन 7500 कदम चलने से लो ब्लड प्रेशर को ठीक करने में मदद मिल सकती है।
  • तनाव कम करने में मदद – प्रतिदिन  सिर्फ 7500 कदम चलने से तनाव और चिंता को 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। हाल के एक अध्ययन में यह भी पाया गया है कि चलने से अवसाद के लक्षणों को को भी कम किया जा सकता है। तनाव और अवसाद के लिए आप Patanjali Divya Medha Vati का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

प्रतिदिन 7500 कदम चलने से हृदय रोग, टाइप 2 मधुमेह, अवसाद और मोटापा होने जोखिम भी कम हो जाता है। वास्तव में, एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि जो लोग प्रति सप्ताह सिर्फ 3-4 घंटे चलते हैं, उनकी मृत्यु दर उन लोगों की तुलना में कम होती है, जो बिल्कुल भी नहीं चलते हैं।

यदि आप प्रतिदिन 7500 कदम या 6 किलोमीटर चलते हैं तो इस हिसाब से आप अपने जीवन के अंत तक लगभग 175,000 किलोमीटर चल चुके होंगे। अब अगर इतना चलेंगे तो कभी न कभी घुटनो में और खासकर एड़ियों में दर्द तो शुरू होगा ही। तो फिर इससे बचने के लिए क्या करें ताकि हमारी जिंदगी की गाड़ी बिना रुके चलती रहे। लेकिन उससे पहले यह जानते हैं की आखिर ये 10 हज़ार कदम का किस्सा शुरू कहाँ से हुआ।

10 हज़ार कदम के चलन की शुरुवात

1964 में टोक्यो (जापान की राजधानी) को ओलंपिक्स खेलों का आयोजन करना था। और जैसा कि आप जानते ही होंगे कि ओलंपिक्स खेलों से एक साल पहले अक्सर लोगों में इसकी चर्चा काफी जोर शोर से होती है। तो जापान में भी ऐसा ही हुआ।

वहां के लोगों को बताया गया की उनकी जीवनशैली कितनी ख़राब है। बस इसी बात से उस दौर के लोगों में फिटनेस का विषय ट्रेंड करने लग गया। फिर जब ओलंपिक्स ख़त्म हुए तो जापान की एक घड़ी बनाने वाली कंपनी ने दुनिया का पहला Pedometer (कदम गिनने वाली घड़ी) बना डाली। उस घड़ी को कमर पर लगाना पड़ता था। उस Pedometer का नाम Manpo-kei था जिसका मतलब जापानी भाषा में 10 हजार कदम होता है।

लोगों में यह घड़ी काफी लोकप्रिय हुई। फिटनेस उद्योग में इसने प्रति दिन कम से कम 10 हज़ार कदम चलने का लक्ष्य निर्धारित कर दिया। और इसे देखते हुए पूरी दुनिया में वही चलन चल पड़ा है जो आज तक चला आ रहा है। लेकिन यह संख्या कही से भी वैज्ञानिक या रिसर्च तोर पर आधारित नहीं है। 

शोध (Research) – Do You Really Need to Walk 10000 Steps a Day?

2019 में हॉवर्ड यूनिवर्सिटी की एक शोध में यह पाया गया की 7500 कदम से ज्यादा चलने का कोई ख़ास फायदा नहीं होता। हालांकि, आप चल सकते हैं, लेकिन उसकी कोई ख़ास अव्यश्कता नहीं है।

असल में, 2-4 हज़ार कदम चलने से भी आपको फायदा मिल सकता है। इसलिए खुद को ज्यादा तनाव में रखने की जरुरत नहीं है क्योंकि ज्यादा चलने से आपके पैर के जोड़ों पर बुरा असर भी पड़ सकता है, खासकर आपकी एड़ियों पर।

ज्यादा चलने से एड़ियों में क्या असर पड़ता है?

हमारी एड़ी में Achilles tendon होता है। Tendons वो ऊतक (tissue) होते हैं जो हमारी माशपेशियों को हमारी हमारी हड्डियों से जोड़ते हैं। हमारे शरीर में मौजूद सबसे मजबूत और मोटा ऊतक Achilles tendon होता है। यह हमारे शरीर का ढेर सारा बोझ उठाता है। इसका नाम ग्रीक देवता Achilles के नाम पर रखा गया है।

Achilles tendon

चाहे हम चल रहे हों, भाग रहे हों या कूद रहे हों, Achilles tendon लगातार हमारा ख्याल रखता है। जब हम अपने पैर को मोड़ते हैं, तो यह ऊतक खिंचता है और अगले मूवमेंट के लिए खुद को तैयार करता है।

हमारे शरीर में कुल 4 हज़ार tendons होते हैं। ये हमारी हर चीज में हमारी मदद करते हैं जैसे कि कुछ पकड़ना या खाना चबाना, आदि। इन tendons की संरचना ऐसी होती है जो इन्हें लचीला बनाता है। इनमें कोलेजन (Collagen) और इलास्टिन (Elastin) नाम के प्रोटीन होते हैं जो मिलकर रेशे (Fiber) बनाते हैं। कुछ tendons के ऊपर सुरक्षा कवच होता है लेकिन Achilles tendon के ऊपर सिर्फ त्वचा की एक परत होती है।

tendons जहां जोड़ों से मिलते हैं वहां बुर्सा (Bursa) नाम की तरल से भरी हुई छोटी-छोटी थैलियां होती हैं। ये हमें जोड़ों में सूजन और दर्द से बचाती हैं। बाकी के ऊतकों से अलग, tendons में खून की सप्लाई काफी कम होती है। इसलिए अगर इन्हें चोट आये तो इन्हें ठीक होने में लम्बा वक़्त लगता है। इसलिए एड़ी के दर्द को बिलकुल भी नज़रअंदाज़ न करें।

किन लोगों की एड़ियों में ज्यादा असर पड़ता है?

सपाट पैर (Flat foot) वाले लोगों की एड़ियों में काफी समस्याएं देखी जाती हैं। हर 10 में से एक इंसान का पैर सपाट होता है। अगर वे ज्यादा चलते हैं तो उनके पैरों में दर्द होने लगता है जो की उनकी टांगो में भी फैलता है। ऐसे में डॉक्टर्स जूतों के अंदर flat foot insoles लगाने की हिदायत देते हैं। सपाट पैर वाले लोगों को आरामदायक जूते ढूंढ़ने में भी काफी परेशानी होती है।

जब हम चलते हैं तो Achilles tendon में कोलेजन (Collagen) के रेशे सिकुड़ते हैं। अगर ये रेशे फट जाते हैं तो शरीर तुरंत ही इनकी मरम्मत में लग जाता है। फटे हुए रेशे को सहारा देने के लिए वो जल्दबाज़ी में नए रेशे बनाने लगता है जो कहीं भी उगने लगते हैं। फिर इन रेशों को अपना पोषण मिल सके, इसके लिए खून किसी तरह रास्ता ढूंढ के इनके पास पहुंच जाता है। और इसी वजह से गड़बड़ हो जाती है। खून के यहाँ जमा होने के कारण tendons सूज जाता है और हमें दर्द होने लगता है। इस हालत में tendons अपना लचीलापन पूरी तरह खो देते हैं और इसलिए इन्हें और आसानी से चोट लगने लगती है।

खिलाडियों के साथ भी अक्सर ऐसा होता है, क्योंकि हर खेल में कुछ विशेष मांसपेशियों का इस्तेमाल ज्यादा होता है। इसलिए बार-बार वही पर चोट लगती रहती है। लेकिन आप खुद को चोट न लगने दें। उतना ही चलें जितने में आप बेहतर महसूस करें। और यदि आपका पैर सपाट है तो जूतों में flat foot insoles लगाएं और heels पहनने से बचें।

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